संपत्ति हड़पने के आरोप में बड़ा कदम, रामलली को नारी निकेतन भेजा गया
भदोही | रिश्तेदार की धन-संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने के मामले में दोषी करार दी गईं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामलली मिश्र को लखनऊ स्थित नारी निकेतन बंदी गृह स्थानांतरित कर दिया गया है। रामलली मिश्र बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र की पत्नी हैं। अदालत द्वारा 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद शासन से मिले आदेश के आलोक में जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। हालांकि, इसी मामले में दोषी पाई गईं उनकी बहू रूपा मिश्र को फिलहाल स्थानीय जिला जेल में ही रखा गया है।
संपत्ति हड़पने के मामले में अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी के पूर्व विधायक विजय मिश्र के खिलाफ विभिन्न थानों में 80 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हाल ही में एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक रिश्तेदार की जमीन और संपत्ति हड़पने के गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने बाहुबली पूर्व विधायक विजय मिश्र, उनकी पत्नी रामलली मिश्र और बेटे विष्णु मिश्र को दोषी पाते हुए 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने उनकी बहू रूपा मिश्र को भी इस अपराध में संलिप्तता के लिए 4 वर्ष की जेल की सजा मुकर्रर की है।
पूर्व विधायक और बेटा पहले से ही दूसरी जेलों में हैं बंद
इस मामले में सजा होने से पहले ही पूर्व विधायक विजय मिश्र प्रशासनिक आधार पर आगरा की केंद्रीय जेल में निरुद्ध हैं, जबकि उनका बेटा विष्णु मिश्र लखीमपुर खीरी की जिला जेल में बंद है। अदालत से सजा का ऐलान होने के बाद विजय मिश्र की पत्नी रामलली और बहू रूपा मिश्र को ज्ञानपुर स्थित जिला कारागार लाया गया था। इसके बाद शनिवार की शाम शासन से विशेष निर्देश प्राप्त होते ही रामलली मिश्र को कड़े सुरक्षा घेरे में लखनऊ के नारी निकेतन बंदी गृह के लिए रवाना कर दिया गया।
जेल मैनुअल के नियमों के तहत की गई स्थानांतरण की कार्रवाई
इस प्रशासनिक फेरबदल के संबंध में जानकारी देते हुए जेल अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि जेल मैनुअल और शासकीय नियमों के अनुसार, जिन महिला बंदियों को 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, उन्हें उच्च सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था के लिए नारी निकेतन लखनऊ स्थानांतरित करने का प्रावधान है। इसी नियम के तहत रामलली मिश्र पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि बहू रूपा मिश्र को 4 साल की सजा मिली है, जो कि तय सीमा से कम है, इसलिए वे अभी स्थानीय जिला कारागार में ही अपनी सजा काटेंगी। भविष्य में शासन से जो भी नए दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुरूप आगे का निर्णय लिया जाएगा।

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