ईंधन बचत अभियान में CRPF आगे, वाहनों की तेल खपत में की कमी
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच देश में ईंधन संरक्षण को लेकर एक बड़ी मुहिम शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आम जनता और सरकारी तंत्र से ईंधन बचाने की भावुक अपील के बाद खुद सरकार और सुरक्षा बल इसके क्रियान्वयन में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री ने इस पहल की शुरुआत स्वयं से करते हुए अपने काफिले में वाहनों की संख्या को 50 फीसदी से भी ज्यादा कम कर दिया है। पीएम मोदी की इस पहल से प्रेरणा लेते हुए अब देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने भी अपने वाहनों के ईंधन खर्च में कटौती करने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है।
सीआरपीएफ महानिदेशालय का सख्त आदेश, मासिक कोटे में होगी कटौती
प्रधानमंत्री की अपील का असर देखते हुए सीआरपीएफ महानिदेशालय ने गुरुवार को एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत बल की सभी यूनिटों, कार्यालयों, संस्थानों और ट्रेनिंग सेंटरों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने वाहनों की मासिक तेल खपत में तत्काल प्रभाव से 10 प्रतिशत की कटौती करें। यह टारगेट बल की हर महीने होने वाली औसत तेल खपत के आधार पर तय किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक और गैर-जरूरी कार्यों में गाड़ियों के इस्तेमाल को सीमित करना है ताकि देश के बहुमूल्य ईंधन संसाधन को बचाया जा सके।
ऑपरेशनल ड्यूटी और सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता
महानिदेशालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि तेल बचाने की इस कवायद का असर बल की सुरक्षा तैयारियों पर नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासनिक ड्यूटी और स्थिर लोकेशंस (स्टैटिक लोकेशन) पर तैनात वाहनों की संख्या में तो कटौती की जाएगी, लेकिन जो गाड़ियां संवेदनशील और ऑपरेशनल ड्यूटी (आतंकवाद विरोधी या आंतरिक सुरक्षा अभियान) में लगी हैं, वहां बेहद विवेकपूर्ण ढंग से काम लिया जाएगा। बल ने साफ किया है कि देश की 'सेफ्टी और सिक्योरिटी' से किसी भी कीमत पर समझौता किए बिना ही गाड़ियों का इस्तेमाल कम किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के काफिले भी हुए आधे
ईंधन के साथ-साथ खाद्य तेलों की खपत में भी कमी लाने की प्रधानमंत्री मोदी की इस दूरदर्शी योजना का असर पूरे देश के वीआईपी कल्चर पर दिखने लगा है। पीएम मोदी के अपने काफिले को आधा करने के बाद गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के काफिलों में शामिल गाड़ियों की संख्या भी घटकर आधी रह गई है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों ने भी तेल बचाने के उद्देश्य से अपनी गाड़ियों की संख्या में भारी कटौती की है। भाजपा शासित राज्यों सहित देश के कई अन्य हिस्सों में भी प्रशासनिक स्तर पर ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाने शुरू हो गए हैं।

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