बिड़ला का हाथ, वीआई शेयर ने किया 52 हफ्तों का रिकॉर्ड
मुंबई। टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया के शेयरों में आज जबरदस्त तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। कारोबारी सत्र की शुरुआत सामान्य बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन जैसे ही बाजार में प्रमोटरों द्वारा कंपनी में नई पूंजी निवेश करने की खबर आई, निवेशकों ने जमकर खरीदारी शुरू कर दी। सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला स्वयं इस संकटग्रस्त टेलीकॉम कंपनी में ताजी पूंजी डालने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे कंपनी के भविष्य को लेकर निवेशकों का भरोसा एक बार फिर लौट आया है।
पूंजी निवेश की खबर से शेयर बाजार में भारी उछाल
वोडाफोन आइडिया के शेयरों ने आज बाजार में नई ऊंचाइयों को छुआ है और शुरुआती सुस्ती के बाद इसमें करीब 7 प्रतिशत की बड़ी बढ़त दर्ज की गई है। सुबह के समय शेयर मामूली बढ़त के साथ खुला था, परंतु बिड़ला समूह द्वारा फंड डाले जाने की सूचना मिलते ही भाव 12.72 रुपये के स्तर तक जा पहुंचे। पिछले एक महीने के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का स्टॉक लगभग 38 फीसदी तक चढ़ चुका है, जिससे उन निवेशकों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से निचले स्तरों पर निवेश कर फंसे हुए थे।
वित्तीय संकट के बीच परिचालन सुधारने की कवायद
कंपनी को वर्तमान में अपने दैनिक परिचालन को सुचारू रखने और तकनीक को उन्नत करने के लिए बड़े पैमाने पर फंड की आवश्यकता है। नए उपकरणों की खरीद और 5G विस्तार जैसे लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कंपनी पहले से ही भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकिंग कंसोर्शियम के साथ ऋण के लिए बातचीत कर रही है। प्रमोटरों द्वारा खुद पूंजी लगाने का फैसला बैंकों के सामने भी एक सकारात्मक संदेश भेजेगा, क्योंकि बैंक ऋण देने के लिए कंपनी के सामने प्रमोटरों की प्रतिबद्धता जैसी कुछ कड़ी शर्तें रख रहे थे।
कुमार मंगलम बिड़ला की सक्रियता से लौटा आत्मविश्वास
एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर के मामले में मिली राहत के बाद कुमार मंगलम बिड़ला की नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर वापसी ने कंपनी के भीतर और बाहर आत्मविश्वास को नई ऊर्जा दी है। पिछले सप्ताह रवींदर टक्कर के स्थान पर उनकी नियुक्ति को बाजार ने एक टर्निंग पॉइंट के रूप में लिया है। अब बिड़ला के स्वयं निवेश करने की संभावनाओं ने बैंकों की दिलचस्पी भी वोडाफोन आइडिया को लोन देने में बढ़ा दी है, जिससे कंपनी के लिए फंड जुटाने की राह अब पहले से कहीं अधिक आसान नजर आ रही है।
भविष्य की चुनौतियां और बाजार की उम्मीदें
हालांकि कंपनी को अभी भी एक लंबी दूरी तय करनी है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने उसे एक मजबूत आधार प्रदान किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों का समर्थन और एजीआर जैसे कानूनी मामलों में सुधरती स्थिति कंपनी को अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने और नई तकनीक को अपनाने में मदद करेगी। फिलहाल निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमोटरों द्वारा निवेश की जाने वाली राशि कितनी होगी और आगामी तिमाहियों में कंपनी अपने तकनीकी अपग्रेडेशन के जरिए ग्राहकों को कैसे जोड़ पाती है।

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