नई दुल्हनों के लिए वट सावित्री व्रत से जुड़े खास टिप्स
सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पावन पर्व पति की दीर्घायु, सुखद दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। विशेषकर नवविवाहिताओं (नई दुल्हनों) के लिए शादी के बाद आने वाला पहला वट सावित्री व्रत बेहद खास होता है, क्योंकि वे इस दिन पहली बार इस पूजा से जुड़ी हर परंपरा को बड़े चाव से निभाती हैं। इस अवसर पर महिलाएं बरगद (वट) के पेड़ की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना करती हैं और सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा सुनकर अपने अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं।
नवविवाहिताएं इस विशेष दिन पर अपने लुक, सजने-संवरने और रीति-रिवाजों को लेकर काफी उत्सुक रहती हैं। हालांकि, पहली बार पूजा करने के कारण कई बार तैयारियों को लेकर असमंजस बना रहता है। यदि आप भी इस वर्ष अपना पहला व्रत करने जा रही हैं, तो इन आसान और प्रभावी टिप्स की मदद से अपनी तैयारियों को यादगार और खुद को बेहद आकर्षक बना सकती हैं:
1. पारंपरिक बनारसी या सिल्क साड़ी से पाएं रॉयल लुक
वट सावित्री की पूजा में नई दुल्हनों के लिए साड़ी पहनना सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। इस मंगल अवसर पर लाल, मैरून, नारंगी या चटख पीला रंग चुनना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। आप सिल्क, बनारसी या चंदेरी साड़ी पहनकर एक पारंपरिक और ग्रेसफुल लुक पा सकती हैं। कई परंपराओं में नई दुल्हनें इस दिन अपनी शादी का जोड़ा या भारी साड़ी भी पहनती हैं। यदि आपकी शादी का जोड़ा बहुत भारी है और गर्मी से बचना चाहती हैं, तो बॉर्डर वर्क वाली हल्की सिल्क साड़ी चुन सकती हैं, जो आपको आरामदायक रखने के साथ-साथ रॉयल लुक भी देगी।
2. सोलह श्रृंगार से निखारेगा सुहाग का रूप
नवविवाहिताओं के लिए इस दिन सोलह श्रृंगार करने का विधान है, जो उनके रूप को संपूर्ण बनाता है। मांग में गहरा सिंदूर, हाथों में खनकती लाल-हरी चूड़ियां, पैरों में बिछिया, माथे पर पारंपरिक बड़ी कुमकुम की बिंदी और हथेलियों व पैरों पर लगा आलता (महावर) आपके सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देगा। चूंकि यह आपका पहला व्रत है, इसलिए आप सुहाग के प्रतीक के रूप में नथ और मांगटीका भी कैरी कर सकती हैं।
3. हथेलियों पर रचाएं पिया के नाम की मेहंदी
सौभाग्यवती स्त्रियों के श्रृंगार में मेहंदी का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। व्रत से एक दिन पहले ही हथेलियों पर खूबसूरत ब्राइडल डिजाइन या वट वृक्ष की आकृति वाली विशेष मेहंदी रचाएं। यदि किसी कारणवश पहले मेहंदी नहीं लगा पाई हैं, तो पूजा के दिन इंस्टेंट (तुरंत रंग देने वाली) मेहंदी का उपयोग कर सकती हैं, ताकि पूजा के संकल्प के समय आपकी हथेलियां पिया के नाम के लाल रंग से दमकती रहें।
4. पहले से करें स्किन केयर, बनी रहेगी नेचुरल चमक
चूंकि वट सावित्री का व्रत तपती गर्मियों के महीने में आता है, इसलिए त्वचा की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। व्रत से दो-तीन दिन पहले से ही चेहरे को अच्छी तरह क्लीन और मॉइस्चराइज करें। घर पर ही माइल्ड स्क्रब और चंदन या एलोवेरा का फेसपैक लगाएं, जिससे चेहरे की मृत त्वचा साफ हो जाए और बिना भारी मेकअप के भी आपकी स्किन नेचुरल ग्लो करे। यदि आप निर्जला (बिना पानी के) व्रत रख रही हैं, तो पारण के समय सबसे पहले नारियल पानी या नींबू पानी लें, जिससे शरीर हाइड्रेट रहे और कमजोरी न आए।
5. मौसम के अनुकूल लाइट और वाटरप्रूफ मेकअप
गर्मियों के इस मौसम में धूप और पसीने को ध्यान में रखकर ही मेकअप का चयन करें। बेस तैयार करने से पहले चेहरे पर बर्फ के टुकड़े (आइस क्यूब) से हल्की मसाज करें या एलोवेरा जेल लगाएं, इससे चेहरे के पोर्स बंद हो जाते हैं और मेकअप लंबे समय तक टिकता है। भारी फाउंडेशन के बजाय मैट फिनिश या लाइट बीबी क्रीम का इस्तेमाल करें। आंखों पर वाटरप्रूफ मस्कारा-काजल और होंठों पर न्यूड या सटल लिपस्टिक लगाएं। अंत में बालों के जुड़े में मोगरे या गुलाब के फूलों का ताजा गजरा लगाना न भूलें, यह आपके पारंपरिक लुक में चार चांद लगा देगा।

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