दो साल से खाली पड़े पदों को भी सरेंडर करने की तैयारी
श्रीनगर। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक मायूस करने वाली खबर आई है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने वित्तीय बोझ को कम करने और सरकारी खर्चों में भारी कटौती करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रदेश के किसी भी सरकारी विभाग में नए पदों का सृजन नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासनिक फिजूलखर्ची को रोकने के लिए कई कड़े प्रतिबंध भी लागू कर दिए गए हैं।
दो साल से खाली पड़े पद होंगे समाप्त, विशेष हालात में ही बच पाएगी नौकरी
सरकार के नए आदेश के मुताबिक, जो पद पिछले दो वर्षों से खाली पड़े हैं, उन्हें अब पूरी तरह से समाप्त (सरेंडर) कर दिया जाएगा। इन पदों को दोबारा केवल बेहद खास या आपातकालीन परिस्थितियों में ही बहाल किया जा सकेगा, जिसके लिए वित्त विभाग की लिखित और विशेष मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। सरकार के इस कदम से आने वाले समय में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं।
सरकारी बाबुओं की विदेश यात्राओं और होटलों में होने वाली बैठकों पर लगी रोक
फिजूलखर्ची पर लगाम कसने के लिए सरकार ने अधिकारियों के ऐश-ओ-आराम और वीआईपी संस्कृति पर भी कड़ा प्रहार किया है। अब सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा, निजी होटलों में होने वाली लंबी-चौड़ी बैठकें, सरकारी रात्रिभोज (डिनर), लंच, स्वागत समारोह और भव्य आतिथ्य कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, विशेष और बेहद जरूरी मौकों पर उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को आवश्यकतानुसार ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की छूट रहेगी।
बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा वेतन और पेंशन में हो रहा था खर्च
प्रशासन द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम की मुख्य वजह प्रदेश का बिगड़ता वित्तीय संतुलन है। जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में लगभग साढ़े चार लाख नियमित सरकारी कर्मचारी और अधिकारी हैं। इसके अलावा करीब एक लाख दैनिक वेतनभोगी और अस्थायी कर्मी भी कार्यरत हैं। स्थिति यह है कि जम्मू-कश्मीर के कुल वार्षिक बजट का लगभग 51 फीसदी हिस्सा सिर्फ कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, लोन के ब्याज और बिजली खरीद के भुगतान में ही चला जाता है। इसी आर्थिक दबाव को कम करने के लिए यह नई वित्तीय व्यवस्था लागू की गई है।

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